
श्री दादाजी धूनीवाले जिला चिकित्सालय में प्रसूता श्रीमती रेखा बाई का हुआ सफल ऑपरेशन
खण्डवा 24 अप्रैल, 2025 – प्रसूता श्रीमती रेखा बाई पति राधेश्याम उम्र 28 वर्ष निवासी अंजनिया खुर्द ब्लाक पुनासा को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा 18 अप्रैल को श्री दादाजी धूनीवाले जिला चिकित्सालय सह नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा में लेकर आए थे। जहां डॉ. लक्ष्मी डूडवे स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा देखकर पूर्व की जानकारी लेकर पता चला कि महिला का तीसरा सिजेरियन है। इसके अलावा सोनोग्राफी रिपोर्ट में भी कई जटिलताएं थीं। गर्भाशय के अंदर प्लेसेंटा चिपका हुआ था। यह तब होता है, जब प्लेसेंटा गर्भाशय की मांसपेशियों के माध्यम से गुजर कर गर्भाशय की बाहरी परत तक पहुंच जाता है और कभी-कभी आसपास के अंगों जैसे मूत्राशय और आंतो को भी प्रभावित कर सकता है। प्लेसेंटा या गर्भनाल आमतौर पर गर्भाशय की दीवार से जुड़ा रहता है, लेकिन प्लेसेंटा परक्रेटा में यह उससे भी आगे बढ़ जाता है, जो कि अत्यधिक जटिल अवस्था होती है। इसमें महिला और बच्चे को बचाना चुनौती पूर्ण कार्य है। महिला की गंभीरता को देखते हुए बिना देर किए डॉ. लक्ष्मी डूडवे द्वारा एच.ओ.डी. डॉ. निशा पंवार, डॉ. बरखा कोचले, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. संजीव दीक्षित ,सर्जरी रोग विशेषज्ञ डॉ. एम.एल. कलमे पूरी टीम के सहयोग से 19 अप्रैल को सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया और बेटी ने जन्म लिया जिसका वजन 2 किलो 900 ग्राम है और स्वस्थ है। उनके द्वारा यह भी बताया कि जब प्लेसेंटा निकालने की बारी आई तो प्लेसेंटा काफी अंदर तक धंसा हुआ था और ब्लैडर भी फट चुका था, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव होने से महिला के शरीर से लगभग ढाई लीटर रक्त बह चुका था, जिसका तत्काल प्रबंधन किया गया। महिला को लगातार 6 यूनिट रक्त एवं दो यूनिट सफेद रक्त चढ़ाकर महिला की जान बचाई। अभी मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं एवं आपातकालीन वार्ड में भर्ती हैं।
प्रसूता श्रीमती रेखा बाई द्वारा बताया कि यह मेरा तीसरा सीजर था, इसके अलावा सोनोग्राफी रिपोर्ट में प्लेसेंटा बच्चेदानी में अंदर तक चिपक गया था, इसके कारण मेरी जान को खतरा था। मेरी बचने की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी, मैंने पुनासा और मूंदी में दिखाया था। उसके बाद जिला चिकित्सालय खंडवा में आई। यहाँ डॉ. लक्ष्मी डूडवे, डॉ. निशा पवार ,डॉ. संजीव दीक्षित निश्चेतना विशेषज्ञ, डॉ. एम.एल. कलमे, सर्जरी रोग विशेषज्ञ, डॉ. बरखा कोचले, पूरी टीम ने तुरंत रक्त की व्यवस्था कर मेरा सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया। रक्त की 6 यूनिट चढ़ाई। इसके अलावा डॉक्टरों की पूरी टीम ने लगातार देखभाल की। समय समय पर इंजेक्शन और दवाइयाँ देकर मेरी और मेरे बच्चे की जान बचाई गई। इसके लिए उन्होंने अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, चिकित्सक व नर्सिंग ऑफिसर सभी का आभार व्यक्त किया तथा यहाँ की व्यवस्थाऐं सराहनीय हैं।










